जब पैसों की शीघ्र आवश्यकता हो तो उन्हें जुटाने के कई विकल्पों में से पर्सनल लोन लेना बहुत अच्छा तरीका माना जाता है। यह आप ऑनलाइन भी ले सकते हैं और असुरक्षित पर्सनल लोन बिना कुछ गिरवी रखे भी मिल जाते हैं। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के क्रेडिट अनुशासन दिशानिर्देशों के अनुसार, ऋण का पुनर्भुगतान न करना आपकी वित्तीय साख को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। आइये विस्तार से देखते हैं कि लोन नहीं भरा तो क्या होगा और इसके दीर्घकालिक परिणाम क्या हैं।
अगर आप पर्सनल लोन का भुगतान समय पर नहीं करते हैं तो सबसे पहला असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। क्रेडिट सूचना कंपनी (CIBIL) के अनुसार, एक भी ईएमआई चूकने से आपका स्कोर काफी कम हो सकता है, जिससे भविष्य में कोई नया लोन लेना मुश्किल हो सकता है।
Table of Contents
Toggleबैंक लोन न चुकाने पर क्या सजा हो सकती है – कानूनी धारा और सजा
बैंक लोन न चुकाना प्राथमिक रूप से एक सिविल मामला (Civil Matter) है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति ऋण चुकाने की क्षमता होने के बावजूद जानबूझकर (Willful Defaulter) बैंक के पैसे नहीं भरता या धोखाधड़ी करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा यह समझने के लिए ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881’ को जानना जरूरी है। चेक बाउंस होने या ई-मैंडेट (NACH) विफल होने की स्थिति में धारा 138 के तहत आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है, जिसमें जुर्माना या दो साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है ।
पर्सनल लोन ईएमआई का भुगतान नहीं करने पर क्या होगा?
पर्सनल लोन ना भरे तो क्या होगा, यह देरी की अवधि (Days Past Due) पर निर्भर करता है:
- लेट पेमेंट शुल्क: RBI के नवीनतम 2025-26 नियमों के अनुसार, अब बैंक या एनबीएफसी ‘दंडात्मक ब्याज’ (Penal Interest) के बजाय केवल ‘दंडात्मक शुल्क’ (Penal Charges) ही वसूल सकते हैं। यह शुल्क उचित होना चाहिए और इसे ऋण राशि में जोड़कर ब्याज नहीं वसूला जा सकता।
- रीपेमेंट तारीख से अगले 30 दिन तक: आपको लेट फी देनी होगी और ऋणदाता की ओर से रिमाइंडर कॉल/मैसेज आने शुरू हो जाएंगे।
- 30-90 दिन तक: आपका खाता ‘Special Mention Account’ (SMA) की श्रेणी में आ जाता है। आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से गिरता है।
- 90 दिन के बाद (NPA): RBI मास्टर डायरेक्शन के अनुसार, यदि 90 दिनों तक भुगतान नहीं होता, तो खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद असुरक्षित ऋण नहीं भरा तो क्या होगा? इसके जवाब में बैंक रिकवरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से तेज कर देते हैं।
पर्सनल लोन न चुकाने से जुड़े सम्बंधित नियम
पर्सनल लोन नहीं चुकाया तो क्या होगा, इसके कुछ गंभीर कानूनी और तकनीकी पहलू हैं:
- चेक बाउंस/ई-मैंडेट फेल: यदि आपका ऑटो-डेबिट (NACH) विफल होता है, तो बैंक इसे “Dishonour of Cheque” के समकक्ष मानकर कानूनी नोटिस भेज सकता है।
- सिविल मुकदमा: ऋणदाता बकाया राशि की वसूली के लिए लोक अदालत या सिविल कोर्ट में रिकवरी सूट फाइल कर सकता है।
- वन-टाइम सेटलमेंट (OTS): यदि आप भुगतान में पूरी तरह असमर्थ हैं, तो आप ‘सेटलमेंट’ का विकल्प चुन सकते हैं। ध्यान दें: सेटलमेंट करने से आपके क्रेडिट रिपोर्ट में ‘Settled’ लिखा आता है, जो क्रेडिट स्कोर को लंबे समय के लिए प्रभावित करता है।
यह भी पढ़ें: आधार कार्ड पर ₹2,00,000 का लोन कैसे लें?
लोन रिकवरी के सम्बन्ध में आरबीआई की गाइडलाइन
उधार लेने वालों और बैंकों के बीच नैतिक व्यवहार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के नियम
आरबीआई ने ये दिशा-निर्देश इसलिए जारी किए हैं ताकि लोन कंपनियाँ वसूली की प्रक्रिया में ग्राहकों के अधिकारों का सम्मान करें और नैतिक प्रक्रियाओं का पालन करें।
रिकवरी एजेंट
कोई भी रिकवरी एजेंट गाली-गलौच, धमकी या हिंसा का प्रयोग नहीं कर सकता है। उधार लेने वाले की जानकारी केवल कानूनी रूप से अधिकृत संस्थाओं से साझा की जा सकती है।
संचार
बैंक और एनबीएफसी को ग्राहक को बकाया राशि, पुनर्भुगतान तारीख जैसी जानकारी समय-समय पर देनी चाहिए। संचार सम्मानजनक और संतुलित होना चाहिए ताकि कोई असुविधा न हो।
पारदर्शिता
लोन एग्रीमेंट में सभी आवश्यक जानकारी जैसे ब्याज दर, ईएमआई अवधि, पेनल्टी और शुल्क को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए ताकि ग्राहक पूरी तरह अवगत रहे।
डेटा सुरक्षा
सभी बैंक और एनबीएफसी को ग्राहकों की निजी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए और उसे किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
ग्राहक अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है
आरबीआई की इन गाइडलाइनों का पालन सभी बैंकों और एनबीएफसी के लिए अनिवार्य है ताकि लोन वसूली प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
क्या होता है अगर पर्सनल लोन ईएमआई का भुगतान नहीं किया जाता है
अगर आप पर्सनल लोन की ईएमआई समय पर नहीं भरते हैं, तो इसके कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
लेट पेमेंट शुल्क और पेनल्टी:
समय पर ईएमआई न चुकाने पर लोनदाता आपसे लेट पेमेंट शुल्क और पेनल्टी चार्ज वसूलते हैं, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
रिकवरी कॉल और मैसेज:
लगातार देरी करने पर आपको रिकवरी एजेंटों से कॉल और मैसेज आने लगते हैं, जो आपके लिए मानसिक तनाव का कारण बन सकते हैं।
क्रेडिट स्कोर पर असर:
समय पर ईएमआई न चुकाने से आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है, जिससे भविष्य में लोन लेना और भी मुश्किल हो सकता है।
क्या लोन न चुकाने पर जेल हो सकती है?
अक्सर लोग पूछते हैं कि लोन न चुकाने पर जेल हो सकती है? इसका उत्तर यह है कि केवल किस्त न चुकाने पर सीधा जेल नहीं होती। लेकिन, यदि आपने ऋण लेते समय फर्जी दस्तावेज दिए हैं (Fraudulent intent) या ईएमआई बाउंस होने पर धारा 138 के तहत कोर्ट के समन का उल्लंघन किया है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल की संभावना हो सकती है। इसलिए, पर्सनल लोन नहीं चुकाने पर क्या होगा यह सोचने के बजाय, हमेशा अपनी चुकौती क्षमता (Repayment Capacity) के अनुसार ही उधार लें।
क्रेडिट स्कोर पर पर्सनल लोन का भुगतान न करने का प्रभाव
लोन का भुगतान न करने से क्रेडिट स्कोर बुरी तरह प्रभावित होता है। जब आप भुगतान की तारीख पर पैसे नहीं चुकाते हैं, तो बैंक या एनबीएफसी क्रेडिट ब्यूरो को यह जानकारी देती है। आप जितनी ज़्यादा रीपेमेंट समय पर चुकाने में असफल होते हैं, आपका क्रेडिट स्कोर उतना ज़्यादा कम होता जाता है। आप पैसा चुकाने में जितने ज़्यादा दिन लगाएंगे, आपका स्कोर भी उतना ही अधिक प्रभावित होगा।
इसके चलते अगर आपका क्रेडिट स्कोर 650 से कम हो जाता है तो आपको अपनी शर्तों पर लोन मिलने में बहुत परेशानी होगी।
अपना क्रेडिट स्कोर बढ़ाने के लिए हमेशा समय पर भुगतान करें। इसके लिए आप ज़ाईप जैसी एप का प्रयोग कर सकते हैं जहाँ आपको ऑटो-डेबिट की सहूलियत मिलती है।
क्या पर्सनल लोन न चुका पाना समस्या बन सकता है?
क्षमता से ज़्यादा लोन लेना –
लोग अक्सर पर्सनल लोन लेते समय यह गलती कर बैठते हैं। आप को इस बात की गांठ बाँध लेनी चाहिए कि आप सिर्फ उतनी ही राशि का लोन लेंगे जितना आप आसानी से चुका पाएं। इसके लिए आपको लोन लेते समय अपनी आमदनी, वर्तमान के खर्चे और भविष्य में आने वाले खर्चे जैसी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आपको हमेशा पर्सनल लोन ईएमआई कैलकुलेटर का प्रयोग करके यह देख लेना चाहिए कि आपको अपनी सुविधा के अनुसार ईएमआई राशि पाने के लिए क्या पुनर्भुगतान अवधि चुननी पड़ेगी।
लोन एग्रीमेंट न पढ़ना –
लोन एग्रीमेंट पढ़ना यह सुनिश्चित करता है कि आपको लोन के सभी शुल्कों के बारे में पता है। इससे आपके ऊपर कोई अप्रत्याशित पैसों का बोझ नहीं आएगा।
बजट नहीं बनाना –
बजट न बनाने पर खर्चों को नियंत्रण में रखना मुश्किल हो सकता है जिसकी वजह से पर्सनल लोन चुकाने में समस्या आ सकती है।
यह भी पढ़ें: लोन क्या है और लोन कितने प्रकार के होते हैं?
निष्कर्ष
पर्सनल लोन नहीं चुकाने पर क्या होगा, यह अब आप स्पष्ट रूप से समझ गए होंगे। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए हमेशा बजट बनाएं और केवल विश्वसनीय व विनियमित एनबीएफसी (Regulated NBFC) जैसे कि ज़ाईप (Zype) से ही ऋण लें जो पारदर्शी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आप लोन लेते समय इस बात पर ध्यान दें कि आपको हर महीने ईएमआई के रूप में कितना भुगतान करना पड़ेगा और तब ही लोन लें जब आप को विश्वास हो कि आप आसानी से यह पैसा चुका पाएंगे.
आपका क्रेडिट स्कोर खराब होगा, दंडात्मक शुल्क लगेगा और ऋणदाता कानूनी नोटिस भेज सकता है।
सामान्यतः यह सिविल मामला है। जेल केवल धोखाधड़ी (Fraud) या चेक बाउंस (Section 138) के सिद्ध होने पर ही हो सकती है।
लोन डिफ़ाल्टर को लिखित रूप में एक नोटिस प्राप्त करने का अधिकार है, बैंक या एनबीएफसी के प्रतिनिधि से बात करने का अधिकार है, लोन कंपनी के साथ समझौता करने का अधिकार है, उसकी संपत्ति की नीलामी के खिलाफ आपत्ति का अधिकार है, आदि.
अगर कोई पूरे लोन की भरपाई करने में असमर्थ होता है तो लोन कंपनी उस व्यक्ति को सेटलमेंट का प्रस्ताव दे सकती है. इसमें व्यक्ति एक निश्चित राशि देकर लोन बंद करवा सकता है.
इसकी सजा बहुत सारी बातों पर निर्भर करती है जैसे देरी की अवधि, बकाया राशि, लोन कंपनी की पॉलिसी, आदि. आमतौर पर आपके ऊपर लोन कंपनी द्वारा जुर्माना लगाया जाता है और मुकदमा किया जा सकता है.
आप संबंधित बैंक/एनबीएफसी के नोडल अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं। यदि 30 दिन में समाधान न मिले, तो RBI लोकपाल (Ombudsman) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
अगर आप 6 महीन तक किश्त नहीं भरते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर खराब होता है, पेनल्टी चार्जेस लगते हैं और आपके ऊपर लोन कंपनी मुकदमा भी चला सकती है.
ईएमआई समय पर न देने पर आपको पीनल चार्जेज़ देने पड़ते हैं और बकाया राशि पर ब्याज भरना पड़ता है.
पर्सनल लोन सेटलमेंट के लिए लोन कंपनी से संपर्क करें। वे आपको एक निश्चित राशि का प्रस्ताव देंगे, जिसे चुकाने पर आपका लोन खाता बंद हो जाएगा। इस प्रक्रिया को वन-टाइम सेटलमेंट भी कहा जाता है।
आपका लोन खाता NPA हो जाएगा और बैंक कानूनी तरीके से वसूली (Legal Recovery) की प्रक्रिया तेज कर देगा।
भारत में पर्सनल लोन न चुकाने पर सीधा जेल नहीं होती, क्योंकि यह एक सिविल मामला है, न कि आपराधिक अपराध। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखाधड़ी करता है या गलत दस्तावेज देकर लोन लेता है, तो बैंक कानूनी कार्रवाई कर सकता है, जिससे जेल जाने की संभावना हो सकती है।
यदि कोई व्यक्ति पर्सनल लोन की ईएमआई समय पर नहीं चुकाता, तो बैंक या NBFC उसे एक लीगल नोटिस भेज सकता है। यह एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें लोन का बकाया भुगतान करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी जाती है। समय पर जवाब न देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यदि कोई NBFC (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) कर्ज न चुकाने पर लीगल नोटिस भेजती है, तो उधारकर्ता को जल्द से जल्द बैंक से संपर्क कर समाधान निकालना चाहिए। यदि भुगतान नहीं किया जाता, तो NBFC वसूली एजेंट भेज सकती है, क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है और मामला अदालत तक जा सकता है।
90 दिन तक ईएमआई न भरने पर लोन अकाउंट NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) बन जाता है और आपकी जानकारी कलेक्शन एजेंसी को भेजी जा सकती है। Zype जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर समय रहते भुगतान करने से यह स्थिति टाली जा सकती है।
सामान्यत: ईएमआई न चुकाना सिविल मामला होता है, क्रिमिनल नहीं, यानी सीधा जेल नहीं होती। लेकिन लगातार इंकार करने या धोखाधड़ी की स्थिति में कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
अगर एजेंट कॉल या मैसेज से परेशान करे, तो सबसे पहले कंपनी के कस्टमर केयर में शिकायत करें। Zype पर पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी है, इसलिए इस तरह की स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है।
कर्ज न चुकाने से आपका क्रेडिट स्कोर गिर जाता है, भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है और कलेक्शन एजेंसी द्वारा क़ानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।